घर में
घर में , बस हम दोनो ही रहते थे , एक वो और एक मैं , प्यार बहुत था , और तकरार भी , और थोड़ी बहुत मार भी .. उसका मेरे सिवा ना कोई था , मेरा बस , एक वो ही तो सहारा था .. शाम ढले वो आता , थका हारा बेचारा था .. मैं प्यार से जाता पास , बस बगल मे जा बैठता .. वो सिर पे हाथ फेर के , फिर कानो को था खींचता .. बिन बोले वो समझ था जाता , कैसे बताऊं , क्यूँ मैं उसको इतना चाहता .. बचपन से , उसकी गोद मे खेला , हर नखरे को मेरे उसने , हँस - हँस के है झेला .. आज भी उसकी गोद , मेरी पसंदीदा जगह हैं .. मेरे हँसने रोने की , बस वो ही एक वजह हैं .. वो खाना खाए , तो मैं खाऊँ .. वो रोए तो मैं रोयूँ .. कभी मैं तकिया , तो कभी वो , ब...